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Sathi Sath Nibhana

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"ना कर तू इस क़दर जानां मेरे वज़ूद को दरगुज़र तू जो चाहे तो कर दूँ रौशन बन चराग़-ए-रहगुज़र। है ऐसी भी क्या बेरूख़ी इस ख़ाकसार से भला तू जो कह दे तो बन जाऊं तेरी मंज़िल की गुज़र। ❤❤प्रवीणा इजाजत तो दो हमें की तुम्हारे लिए कुछ कर दिखाएं, तुम कहो तो सही तुम्हारे प्यार में हंसते-हंसते मर जाएं। दीक्षा रघुवंशी नायक थोड़ी सी मुहब्बत थी,बहुत सी चाहत थी, तेरी बाहों का घेरा था, दिल को बड़ी राहत थी...। उत्सव ""काव्य "" बड़ी शिद्दत से किया है खुद पर ऐतबार, दरिया ए रहमत और वफ़ा की मैं तलबगार। उषा सिंह"

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ISBN: 978-93-5452-348-9 | Language: Hindi | Pages: 245
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" My books are marked down because most of them are marked with a on the edge by publishers. "

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