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Nari

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" इस संचयन में बहुत सारी भावनाएं सम्मिलित है जैसे अप्रसनता, अनुराग, संताप (पीड़ा ), दायित्व आदि |जिसके माध्यम से आप अपने भावनाओं को वक़्त कर सकते है| कहते है - "" समस्तास्तव देवि भेदाः, स्त्रियाः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्, का ते स्तुतिः स्तव्यपरापरोक्तिः॥ - दुर्गा सप्तशती "" अर्थात्:- हे देवी! समस्त संसार की सब विद्याएँ तुम्हीं से निकली है तथा सब स्त्रियाँ तुम्हारा ही स्वरूप है। समस्त विश्व एक तुमसे ही पूरित है। "

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ISBN: 978-81-946139-1-6 | Language: English | Pages: 163
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" My books are marked down because most of them are marked with a on the edge by publishers. "

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