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Modi Ji Hosh Mein Aao

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जीवन के इस सफर में, जब मैं साथ चलते हुए चेहरों को देखता हूं, तो ऐसा लगता है कि व्यंग ही जीवन है और कभी कभी जब परिस्थितियां विपरीत होती हैं, तो जीवन व्यंग्य लगने लगता है। यही इस जीवन की सच्चाई है, जिससे इंसान कभी मुंह मोड़ नहीं सकता। जीवन के सफर में बहुत कुछ पढ़ा,सुना, गुना,चुना और आगे बढ़ा। अक्सर मेरी रचनाओं में आबिद सुरती, लतीफ घोंघी, हरिशंकर परसाई, केपी सक्सेना आदि जैसे महान व्यंगकारों का अक्स नजर आता है। बहुत कुछ सीखा है इनसे, बहुत कुछ पढ़ा है इनको और व्यंग्य की दुनियां में इनका जो योगदान है, इस देश, समाज के लिए, शायद वह बहुत ही ज्यादा है,अतुलनीय है। बस इन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए मैंने भी व्यंग की विधा को अपनाया और अपने आप को इस विधा के लिए समर्पित कर दिया। इस विधा को अपनाने के के पीछे मेरी पत्नी श्रीमती रश्मि खरे का भी बहुत बड़ा हाथ रहा है, क्योंकि शादीशुदा जीवन में जब तक नोकझोंक ना हो, मजा नहीं आता। और ये नोकझोंक, न जाने कितनी बड़ी-बड़ी व्यंग रचनाओं को जन्म दे देती है। साथ ही मैं धन्यवाद देना चाहूंगा अपनी वायु सेना की नौकरी को जिसने मुझे बहुत कुछ सिखाया, न जाने कितने लोगों से मिलवाया। इस नौकरी के कारण ही अपने देश, समाज के लोगों के चाल-चरित्र और देश की राजनीति से उत्पन्न बहुत सारे आयामों को समझने में मुझे बहुत मदद मिली। साथ ही मैं धन्यवाद देना चाहूंगा अपने दोस्तों का, जिन्होंने समय-समय पर मेरा उत्साह बढ़ाया और मुझे कुछ नया करने की प्रेरणा दी। सबसे बड़ा धन्यवाद तो मनिनानेस्ट पब्लिकेशन हाउस का है, जिसके कारण आज मेरी रचना आप सबके बीच आ रही है, क्योंकि मेरी रचनाओं को आप तक पहुंचाने का श्रेय सिर्फ और सिर्फ मनिनानेस्ट पब्लिकेशन हाउस को ही जाता है । अंत में मैं धन्यवाद देना चाहूंगा मुंबई और लखनऊ को, जिसने मुझे आगे बढ़ाया , बहुत कुछ सिखाया और राजनीति में व्यंग और व्यंग में राजनीति खोजने का चश्मा दिया, जिसे मैं आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं।

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ISBN: 978-93-5452-596-4 | Language: English | Pages: 147
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